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Wednesday, November 23, 2011

पुरुष की घबराहट का प्रतीक है महिला…


पुरुष की घबराहट का प्रतीक है महिला…

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च 2009
ishtar_2कई भाषा वैज्ञानिक और इतिहासकार ऋग्वेदकालीन आर्यों का असूरियों-फिनिशियों से भाषायी-सामाजिक संबंध जोड़ते हैं और उनकी प्रधान देवी ईश्तर का संबंध संस्कृत शब्द स्त्री की व्युत्पत्ति से जोड़ते हैं।
संस्कृत में महिला के लिए स्त्री या त्रिया दोनो ही शब्दरूप मिलते हैं। हिन्दी में , खास तौर पर लोक शैली में महिला को तिरिया कहा जाता है। शब्द शक्ति की अगर बात करें तों इसका ध्वन्यार्थ स्त्री की तुलना में नकारात्मक भाव उजागर करता है। इसमें संस्कृत- श्लोक त्रिया चरित्रम...की बड़ी भमिका रही है क्योंकि स्त्री से बने तिरिया में नारी के क्रिया-कलापों के  नकारात्मक पक्ष को समेट दिया है। तिरिया चरित्तर, तिरिया हठजैसी उक्तियों में यह स्पष्ट है। पद्मावत में जायसी कहते है-तुम्ह तिरिया मतिहीन तुम्हारी....। तिरिया या तिरीया रूप बने हैं संस्कृत के त्रयीत्रय या त्रि से जिनके विभिन्न अर्थों में एक अर्थ स्त्री का भी है।
women_symbol_200स्त्री शब्द के मूल में संस्कृत की स्त्यै धातु है। यह समूहवाची शब्द है जिसमें ढेर, संचय, घनीभूत, स्थूल आदि भाव शामिल हैं। इसके अलावा कोमल, मृदुल, स्निग्ध आदि भाव भी निहित हैं। गौर करें कि स्त्री ही है जो मानव जीवन को धारण करती है। सूक्ष्म अणुओं को अपनी कोख में धारण करती है। उनका संचय करती है। नर और नारी में केवल नारी के पास ही वह कोश रहता है जहां ईश्वरीय जीवन का सृजन होता है। उसे ही कोख कहते हैं। कोख में ही जीवन के कारक अणुओं का भंडार होता है। वहीं पर वे स्थूल रूप धारण करते हैं। गर्भ में सृष्टि-सृजन का स्निग्ध, मृदुल, कोमल स्पर्श उसे मातृत्व का सुख प्रदान करता है। स्त्यै में ड्रप् प्रत्यय लगने से बनने वाले स्त्री शब्द में यही सारे भाव साकार होते है। गौर करें कि संस्कृत में किसी भी जीव के पूरक पात्र अर्थात मादा के लिए स्त्री शब्द है क्योंकि नए जीव की सृष्टि का अनोखा गुण उसी के पास है। इसीलिए वह मातृशक्ति है, इसीलिए वह स्त्री है। कई भाषा वैज्ञानिक और इतिहासकार ऋग्वेदकालीन आर्यों का असूरियों-फीनिशियों से भाषायी-सामाजिक संबंध जोड़ते हैं और फिनिशियों की प्रधान देवीईश्तर का संबंध संस्कृत शब्द स्त्री के जन्म से जोड़ते हैं। डॉ भगवतशरण उपाध्याय की वृहत्तर भारत पुस्तक में सरसरी तौर पर यह उल्लेख आता है पर इसका कोई प्रमाण वहां नहीं मिलता। हालांकि ईश्तर में कई भारतीय देवियों से सादृश्यता है।  देवी दुर्गा की तरह वे सिंह वाहिनी है। ईश्तर शौर्य,युद्ध तथा काम की देवी है। लक्ष्मी की तरह उनके साथ भी उलूक नजर आते हैं। 
women_symbol_200संस्कृत की मह् धातु से बना है स्त्री के के लिए हिन्दी का सर्वाधिक प्रचलित शब्द महिला। यह शब्द स्त्री की महिमा दर्शाता है। इसी शब्द में उस युग की छाया नजर आती है जब पृथ्वी पर मातृसत्तात्मक व्यवस्था थी।महानता, महान, महीयसी, महा, महत्तर जैसे तमाम प्रधानता स्थापित करनेवाले भावों के समेटे हुए शब्दों का जन्म भी उसी मह् से हुआ है जिससे महिला शब्द बना है। मह् में सम्मान, आदर, महत्ता, श्रद्धा महत्वपूर्ण समझना जैसे भाव हैं। जाहिर है मह् से बने महिला शब्द में यही सारे भाव शामिल हैं। हालांकि आप्टे कोश में महिला का अर्थ स्त्री के साथ साथ विलासिनी, मदमत्त स्त्री भी दिया हुआ है। गौरतलब है कि मातृसत्तात्मक समाज में मानव समूदायों का नेतृत्व स्त्री ही करती थी। वही किसी भी समूह की अधिष्ठात्री होती थी।Durga
उस दौर में रिश्तों का जन्म नहीं हुआ था। अपने कुनबे को बढ़ाने के लिए समूह की प्रमुख स्त्री अपनी पसंद से पुरुषों का वरण करती थी। कालांतर में सामाजिक तौर पर ज्यादा शक्ति अर्जित कर चुके मनुष्य की स्मृति में मातृसत्तात्मक नारी का वही रूप किरकिरी की तरह चुभता रहा होगा। लगता है हमारे मनीषियों ने विलासिनी या मदमत्त जैसे भाव इसीलिए मह् धातु से महत्वपूर्ण होने का आभास करानेवाले महिला शब्द के साथ तभी जोड़े होंगे। महिला शब्द पुरुष की घबराहट का प्रतीक लगता है। अपनी पत्रकारिता के शुरूआती दौर में करीब तेईस साल पहले एक मठाधीशनुमा वरिष्ठ पत्रकार जो घनघोर परम्परावादी, सनातन हिन्दू पृष्ठभूमि के अखबार से आए थे, हमें महिला शब्द का अर्थ बताया करते थे कि जो महलों में रहे उसे ही महिला कहते हैं। हम उनके पीठ पीछे मजाक उड़ाते थे कि उर्दू कोशों में महल शब्द तो मिलता है तो महिला क्यों नहीं ? खैर , भाषा पर तब भी ज्यादा बात नहीं होती थी और अब भी नहीं होती।
women_symbol_200लोकबोली का ही एक और शब्द है लुगाई जो हिन्दी, राजस्थानी, बृज,अवधी, भोजपुरी आदि कई बोलियों में खूब प्रचलित है। आमतौर पर इसका अभिप्राय पत्नी से है मगर मूल अर्थ में स्त्री, औरत अथवा नारी के लिए ही लुगाई शब्द का प्रयोग होता है। लुगाई शब्द लोग का स्त्रीवाची है। लोग पुल्लिंग है। लोग शब्द सस्कृत धातुलोक् से जन्मा है जिसका मतलब होता है नज़र डालना, देखना अथवा प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त करना । इससे बने संस्कृत के लोकः का अर्थ हुआ दुनिया , संसार। मूल धातु लोक् में समाहित अर्थों पर गौर करें तो साफ है कि नज़र डालने ,देखने अथवा प्रत्यक्ष ज्ञान करने पर क्या हासिल होता है ? जाहिर है सामने दुनिया ही नज़र आती है। यही है लोक् का मूल भाव। लोक् से जुड़े भावों का अर्थविस्तार लोकः में अद्भुत रहा । पृथ्वी पर निवास करने वाले सभी प्राणियों मे सिर्फ मनुश्यों के समूह को ही लोग कहा गया जिसकी व्युत्पत्ति लोकः से ही हुई है। लोकः का अर्थ मानव समूह, मनुश्य जाति, समुदाय, समूह, समिति, प्रजा, राष्ट्र के व्यक्ति आदि है
women_symbol_200मनुष्य की मेधा ने, मनीषा ने प्रकृति में स्वयं को भी रखा और लोक का एक अर्थ मनुष्य भी हुआ। यूं लोग शब्द में पुरुष-स्त्री का फर्क नहीं है। राष्ट्रभाषा हिन्दी भी इसका फर्क नहीं करती मगर लोकभाषाएं अपनी गहन
tellusarapacisगर्भ में सृष्टि-सृजन का स्निग्ध, मृदुल, कोमल स्पर्श नारी को मातृत्व का सुख प्रदान करता है।
और सूक्ष्म अभिव्यक्ति के लिए लगातार शब्द गढ़ती रहती हैं सो लोग का भी स्त्रीवाची रूप लुगाई बनकर सामने आया। इस लुगाई का बहुवचन लुगायां होता है। अब अब अगर स्त्री-पुरुष की सम्मिलित उपस्थिति की बात करनी हो तो औरत-मर्द की तरह से लोग-लुगाई शब्द का इस्तेमाल होता है। लोक में जागृत-दृष्टिगत विश्व का भाव है। जो कुछ भी सनातन सृष्टि है वह लोक है। नारी शब्द से जाहिर है कि नरका स्त्रीवाची रूप है मगर ऐसा है नहीं। संस्कृत की एक धातु हैनृ जिसका अर्थ होता है मानव, मनुष्य, मनुष्यजाति। इसमें स्त्री-पुरुष का भेद नहीं है। नृ से ही पुरुषवाची नर शब्द बना है और स्त्रीवाची नारी भी। नृ में ही सिंह, पालः या पतिः जैसे शब्दों की संधि से नृसिंह, नृपाल, नृपति जैसे शब्द बनते हैं। नृपाल या नृपति का अर्थ प्रभु, राजा, अधिपति आदि होता है। नृसिंह, नरसिंह का ही शुद्ध रूप है जो भगवान विष्णु का एक अवतार हैं। नृपशु का अर्थ नरपशु होता है। नृपशु में जहां मनुष्य के पशुत्व का भाव है वहीं इससे बने नर पशु में पुरुष के पशुत्व का आभास होता है जबकि ऐसा नहीं है। स्त्री को भी नरपशु की उपमा दी जा सकती है। इसी तर्क प्रणाली पर नृमेध यज्ञ के नरमेध यज्ञ को तौल कर देखें तो अर्थ यही होगा-मनुष्यों के लिए किया जाने वाला यज्ञ।

Thursday, July 28, 2011

बनायें मोबाइल थीम्स,स्क्रीनसेवर,रिंगटोन्स,वालपेपर्स



आप अपने मोबाईल का थीम अपने अनुसार से बना सकते हैं वो भी बिल्कुल मुफ़्त बिना किसी सॉफ्टवेयर के


यही नहीं आप इसकी सहायता से स्क्रीनसेवर,रिंगटोन्स,वालपेपर्स भी आसानी से बना सकते हैं .


देखिये स्क्रीनशॉट
  
इस वेबसाइट पर आपको सबसे पहले साइन-अप करना पड़ेगा 
स्क्रीनसेवर बनाने केलिए आपको सबसे पहले एनीमेशन चुनना पड़ेगा 
इसके बाद बैकग्राउंड कलर या वालपेपर चुने   
इसके बाद फॉण्ट चुने
एनीमेशन टेक्स्ट, टेक्स्ट कलर,टेक्स्ट आउटलाइन कलर,एनीमेशन साइज़ आदि सेट करें 
आपका  स्क्रीनसेवर तैयार है इसे आप डाउनलोड करसकते हैं .   
इस वेबसाइट पर जाएँ                                                  

Nokia C6


नोकिया C6 की विशेषताएँ,तस्वीरें और कीमत

फोन मॉडलनोकिया C6
कम्पनीनोकिया
कीमतRs. 13,300 /-
नोकिया मोबाइल की कीमत सूची
बाकि नोकिया फोन

नोकिया C6 के फीचर्स

नेटवर्क
  • 3G
  • GSM
  • 850/900/1800/1900 MHz
स्क्रीन
  • 3.2 इंच स्क्रीन
  • कलर स्क्रीन
  • 360×640 रेसोल्यूशन
  • टच स्क्रीन
बैटरी
  • 7 घंटे टॉक टाइम
  • 348 घंटे स्टैंड बाई टाइम
कैमरा
  • 5 मेगा पिक्सल
  • विडियो रेकॉर्डिंग
  • डिजिटल ज़ूम
मेमोरी
  • 16 GB Expandable मेमोरी
  • 200 MB Internal मेमोरी
डाटा ट्रान्सफर
  • ब्लूटूथ
  • डाटा केबल
  • पी सि सुइट
इन्टरनेट
  • मोबाइल इन्टरनेट (GPRS)
  • HSDPA इन्टरनेट (3G)
  • Wi-Fi
मनोरंजन
  • MP3 प्लयेर
  • विडियो प्लयेर (3GP,MP4)
  • FM रेडियो
  • गेम्स
मेसेज
  • SMS
  • MMS
  • इ मेल
फोन कॉल
  • कालर ID
  • कॉल सूचि
  • कॉल divert
  • स्पीकर फोन / हैंडस फ्री
अन्य विशेषताएँ
  • GPS
  • क्वर्टी कीबोर्ड (QWERTY)
  • डाकुमेंट एडिटर

सस्ता नोकिया C6-01 जेब के अनुकूल सौदों के साथ हैंडसेट

सेल फोन हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं और हम नोकिया की भागीदारी के लिए इस उपकरण बेहद लोकप्रिय बनाने की उपेक्षा नहीं कर सकते. इस कंपनी को धन्यवाद क्योंकि कोई इन इलेक्ट्रॉनिक के साथ जीवन की कल्पना कर सकते हैं उपकरणों. लोगों की अधिकतम संख्या के लिए नोकिया के साथ चलते हैं जब यह सस्ते मोबाइल फोन या सबसे अच्छा हैंडसेट खरीदने आता है पसंद है. हाल ही में, कंपनी के प्रमुख नेटवर्क कंपनियों की मदद से सस्ता नोकिया C6-01 सौदों शुरू की तरह, O2, 3 मोबाइल, टी मोबाइल, वर्जिन, वोडाफ़ोन और ऑरेंज.

कंपनी इन सौदों की शुरुआत की ताकि हर व्यक्ति इस स्मार्ट फोन का लाभ आसानी से उठा सकते हैं. अब, लोगों के लिए विकल्प मिल गया है किफायती मूल्य पर कई सौदों के तहत 01-C6 नोकिया खरीदने, अनुबंध मोबाइल फोन की तरह सिम मुफ्त सौदों,, भुगतान के रूप में तुम जाओ और 12 महीने मुक्त लाइन किराये. यहाँ, खरीदारों को किसी भी प्रकार के बिना पूरा करने के लिए कोई सौदा चुन अधिकार है के दायित्व या दबाव. वर्तमान परिदृश्य में, उपभोक्ताओं की सबसे करने के लिए अनुबंध सौदों के साथ जाना पसंद है.

सस्ता नोकिया C6-01 सौदों ऑनलाइन मोबाइल फोन की दुकानों के माध्यम से आसानी से खरीदा जा सकता है. व्यक्तिगत इस शक्तिशाली उपकरण के लिए आदेश जगह है, जबकि घर में बैठे कर सकते हैं. जहां तक विनिर्देशों का संबंध है, यह एक नोकिया के कारखाने से सबसे उच्च तकनीक और शानदार फोन की है. यह 3.2 इंच है AMOLED कई नोकिया ClearBlack प्रदर्शन जैसे अन्य प्रदर्शन सुविधाओं, बहु स्पर्श इनपुट विधि, ऑटो के लिए निकटता संवेदक मोड़ बंद, यूआई के लिए सेंसर Accelerometer ऑटो घुमाने के लिए और खरोंच के साथ capacitive टच स्क्रीन प्रतिरोधी गोरिल्ला गिलास प्रदर्शन.

इस मार्ट फोन भी 340MB आंतरिक भंडारण, 256MB रैम, 1GB ROM है, GPRS, Edge, 3 जी, WLAN, ब्लूटूथ, यूएसबी पोर्ट के लिए और स्मृति अंतरिक्ष में वृद्धि करने का विकल्प प्रदान करता है. प्रत्येक उपयोगकर्ता भंडारण क्षमता का विस्तार अप microSD कार्ड के माध्यम से कर सकते हैं 32GB के लिए. हालांकि, कंपनी तुम हैंडसेट के साथ 2GB कार्ड प्रदान करता है. कैमरा हर सेल फोन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. किसी भी अन्य सुविधा या पूछ रहा से पहले विजेट के बारे में विनिर्देश, लोगों के लिए कैमरा गुणवत्ता के बारे में पहले पूछना पसंद करते हैं. हाँ, यह फोन 8mega दोहरी एलईडी फ्लैश के साथ पिक्सेल कैमरा है. सस्ते नोकिया C601 सौदों पाने के लिए, व्यक्ति को किसी भी करने की जरूरत नहीं व्यक्तिगत यात्रा. वह / वह ऑनलाइन दुकानों के माध्यम से फोन खरीद सकते हैं. 

Tuesday, July 26, 2011

शरीर को रखें स्वस्थ्य


शाकाहार व एलो वेरा जेल से शरीर को रखें स्वस्थ्य |




भोजन शरीर की एक ऐसी आवश्यकता है जिसके द्वारा शरीर को प्रयाप्त पोषण मिलता है और व्यक्ति अपनी आयु को सुखपूर्वक भोग करता है | पहले के समस्त आहार शरीर, आयु एवं मौसम की अनुकूलता की ध्यान में रखते हुए लिये जाते थे , परिणामस्वरूप व्यक्ति स्वस्थ्य रहता था | अच्छी निद्रा लेता था और लम्बी आयु भोगता था |
कालांतर में शरीरिक क्षमता, समय तथा मौसम के बारे में चेतना विलुप्त होने लगी और मुँह का स्वाद बढ़ता गया | इसका परिणाम यह निकला की कब, कैसे, क्या और कितना खाना चाहिए, इसके बारे में सोच-विचार बंद हो गया | जब चाहा और मनचाहा खाना खाने की प्रवृति बढ़ने लगी तो परिणाम यह निकला की व्यक्ति का स्वास्थ्य ख़राब होने लगा | विभिन्न प्रकार के रोग पनपने लगे और मानव जीवन इसी दुश्चक्र में फंसता चला गया |
W.H.O ने मांसाहार से होने वाली 160 बिमारियों की सूचि तैयार की है | इन बिमारियों में मिर्गी की बीमारी प्रमुख है | यह बीमारी मस्तिस्क में रिबिपासोलियम नामक कीड़े से होती है , यह कीड़ा सूअर का मांस खाने से हो जाता है | इसी प्रकार जो जानवर गन्दा पानी-भोजन ग्रहण करते है, उनके शरीर में अनेक कीटाणु होते है | ऐसे जानवरों को खाने से मनुष्य के शरीर में अनेक रोग हो जाते है | शाकाहार मांसाहार की अपेक्षा काफी सस्ता और पौष्टिक आहार है जो आसानी से उपलब्ध हो जाता है यानि आर्थिक दृष्टिकोण से भी शाकाहार अच्छा है |
नैतिकता और अध्यात्मिक दृष्टि की कसौटी पर यदि कोई भोजन खरा उतरता है तो वह शाकाहार ही है क्यूंकि मांसाहारी व्यक्ति जिन पशु-पक्षियों को अधिकतर अपना भोजन बनाता है वे पशु-पक्षी खुद ही घास-फल आदि खाकर शाकाहार से ही अपना पेट भरते है |

अतः मांसाहारी मनुष्य शाकाहारी पशु-पक्षियों को अपना भोजन बनाता है और साथ में हिंसा का भागी भी बनता है | मांसाहार छोड़ देने से कई प्रकार के बिमारियों से भी बचा जा सकता है और मूक असहाय पशु-पक्षियों पर होने वाली हिंसा को भी खत्म किया जा सकता है |


वैज्ञानिक मतानुसार मांसाहार परोक्ष रूप से जलवायु परिवर्तन और ग्रीन हाउस गैसों उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है | जलवायु परिवर्तन के क्षत्र में काम कर रहे संगठन का कहना है की मांसाहार के अधिक प्रचालन से वातावरण में कार्बनडाई औक्साइड जैसी गैसों का उत्सर्जन बढ़ता है |
शाकाहार ग्लोबल वार्मिंग को के बढ़ते खतरे को कम करने में सहायक है | शाकाहार या हरी सब्जियों व फलों के लिए अधिक कृषि उत्पादन होगा तो वातावरण संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है | भूमि की उर्वरा शक्ति पेड़ों और जानवरों पर निर्भर करती है | हमें पशु-पक्षी और पेड़-पौधों दोनों का ही संरक्षण करना चाहिए न की उनका भक्षण | नहीं तो एक दिन ये पृथ्वी वीरान हो जायेगी और मनुष्य मांसाहार और शाकाहार दोनों से ही वंचित हो जायेगा |

जो व्यक्ति मांसाहार को शारीरिक शक्ति और बुद्धि कौशल के विकाश के लिए आवश्यक मानते है , वह सच्चाई और वैज्ञानिक अनुसंधानों से भलीभांति परिचित नहीं है , क्यूंकि वैज्ञानिको ने भी शक्ति को मापने के लिये शेर-चिता जैसे पशु को शक्ति मापन का साधन नहीं माना , अपितु शाकाहारी घोड़े को ही शक्ति का माप प्रकट करने के लिये चयन किया | इसी कारण वैज्ञानिक होर्स पॉवर ( Horse Power ) में ही शक्ति मापन का कार्य करते है |


सच्चाई को स्वीकार करें तो शाकाहार प्रकृति का मानव जाती के लिये सर्वोत्तम उपहार है | मनुष्य को शारीरिक शक्ति और विवेक देने के साथ ही प्रकृति के साथ सामंजस्य बैठाने के अद्भुत क्षमता उत्पन्न करता है |

प्रक्रति प्रदत ऐसे आहार से धरती भरी हुई है जिसके उपयोग से मनुष्य जीवन पर्यन्त शारीरिक व मानसिक रूप खुशहाल रह सकता है 
|
एक ऐसा ही पौधा है एलोवेरा जो वास्तविक में आज के वातावरण में स्वस्थ्य रहने के लिये नितांत आवश्यक है |”एक कहावत है पहला सुख निरोगी काया , बनी रहे यौबन की माया” |


एलो वेरा जूस आज के प्रदूषित वातावरण में स्वस्थ्य रहने के लिये प्रत्येक व्यक्ति को लेना ही चाहिए, जिससे के आपके शरीर आने वाले किसी भी प्रकार के रोग से आराम से मुकाबला कर सकता है |